Sandeep Singh @रायगढ़ । शासन और रायगढ़ के विधायक सह वित्त मंत्री जहां रायगढ़ को महानगर में तब्दील करने की आकांक्षा व्यक्त कर चुके हैं और इसपर कदम बढ़ा रहे हैं वहीं मौजूदा ट्रैफिक प्रशासन अभी वर्तमान रायगढ़ शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने में नाकाम साबित हो रहा है। विशेषकर पर्व त्यौहार के मौकों पर ट्रैफिक विभाग की कार्यप्रणाली पूरी तरह से लचर और लाचार दोनों नजर आती है । हर वर्ष की भांति इस बार भी रायगढ़ यातायात पुलिस ने शहर में दीपावली के अवसर पर उमड़नेवाली भीड़ को संभालने के लिए रूट प्लान और नई पार्किंग व्यवस्था बनाई और सदा की भांति इस बार भी नाकाम साबित हुए । नई व्यवस्था का यह हाल रहा कि आम लोग विकट जाम में फंसकर बेहाल हो गए ।
– वन वे और पार्किंग व्यवस्था नाकाम
यातायात पुलिस ने संभावित भीड़ के मद्देनजर शहर के चार प्रमुख मार्गों को वन वे घोषित किया था और पांच प्रमुख स्थानों पर पार्किंग व्यवस्था बनाई थी । साथ ही चारपहिया वाहनों को शहर के मुख्य स्थलों के लिए प्रतिबंधित कर उनके लिए डायवर्शन भी बनाया । पर शहर में उमड़नेवाली भीड़ के सामने पुलिस की ये तमाम व्यवस्थाएं धरी की धरी रह गईं। पूरे शहर में दिन भर जाम लगा रहा और लोग बेहाल रहे ।
– चींटियों की तरह रेंगते लोग और गाड़ियां
रायगढ़ शहर के सारे रास्ते और यहां तक कि गली कूचों में भी यातायात का दबाव अपने चरम पर रहा । भीड़ का आलम यह रहा कि दोपहिया वाहन ही नहीं, पैदल चल रहे लोगों के भी कंधे टकरा रहे थे और आनेजाने में भरी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा था। लोग और वाहन चींटियों की रफ्तार से चलते नजर आ रहे थे । पांच मिनट का रास्ता पचास मिनट में भी तय करने में दिक्कत आ रही थी। इस स्थिति के सामने यातायात पुलिस बिल्कुल बेबस नजर आ रही थी।
– बिना पार्किंग के दुकानें संचालित, सड़कों को बना दिया निजी पार्किंग स्थल; शहर की यातायात व्यवस्था बेपटरी?
आपको बता दे कि शहर की यातायात व्यवस्था बिगड़ने का एक बड़ा कारण दुकानों के सामने बेतरतीब तरीके से खड़े वाहन भी हैं। शहर के अधिकांश दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं है। नतीजतन, खरीदारी करने पहुंचने वाले ग्राहक अपनी गाड़ियां सड़क पर ही खड़ी कर देते हैं और बेफिक्र होकर खरीदारी में व्यस्त हो जाते हैं। इसका खामियाजा आम राहगीरों और वाहन चालकों को जाम के रूप में भुगतना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि कई दुकानदार बिना पार्किंग सुविधा के बेधड़क कारोबार कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नजर इस गंभीर समस्या पर नहीं पड़ रही है। आखिर सार्वजनिक सड़कें दुकानदारों और ग्राहकों की निजी पार्किंग के लिए किसने आवंटित कर दीं? प्रशासन को ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। नियमों की अनदेखी करने वालों पर जुर्माना लगाने के साथ पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए, ताकि शहर की सड़कें अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग से मुक्त हो सकें।
–आउटर और कनेक्टिंग रास्तों पर भी यातायात फेल
शहर के सारे मार्गों और गलियों में विकट जाम को देखते हुए लोगों ने आउटर और कनेक्टिंग रास्तों का इस्तेमाल करना शुरू किया । नतीजा यह रहा कि सारे कनेक्टिंग और आउटर रास्तों में भी जाम की स्थिति विकट हो गई । वैसे भी आउटर रास्तों पर बड़ी गाड़ियां के लिए रूट तय था लिहाजा यहां भी ट्रैफिक व्यवस्था फेल हो गई और लोगों को दिन में ही तारे नजर आने लगे । दरअसल, विगत कुछ वर्षों में रायगढ़ के विकास के साथ साथ जिस प्रकार लोगों का आवागमन बढ़ा है उसके बरअक्स रायगढ़ यातायात पुलिस की तैयारियां और व्यवस्था एकदम नाकाफी है। सामान्य दिनों में भी यातायात व्यवस्था चाक चौबंद नजर नहीं आती है। कमी तंत्र की व्यवस्था में है , इच्छाशक्ति में है , प्लानिंग में है या नेतृत्व की अक्षमता है यह तय करना मुश्किल है । लगता है किसी एक सेगमेंट पर यातायात व्यवस्था की नाकामी का ठीकरा नहीं फोड़ा जा सकता । समूची यातायात पुलिस व्यवस्था ही आमूल चूल परिवर्तन की राह तक रही है । वास्तव में इसमें आपादमस्तक सख्त सुधार की आवश्यकता है। तभी यह वर्तमान और भविष्य के रायगढ़ की अपेक्षाओं पर खरी साबित हो पाएगी । क्या जिम्मेदार पढ़ या सुन रहे हैं ?

Ro.No - 14097/135





