The future of children from the Nat community is in limbo, their education halted without a permanent caste certificate.
ग्रामसभा का प्रस्ताव भी नजरअंदाज, छात्रवृत्ति और शिक्षा के अधिकार से वंचित बच्चे

*सारंगढ़-बिलाईगढ़।*
जिले के सरसीवां तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बालपुर के नट समाज के बच्चे आज भी स्थायी जाति प्रमाण पत्र से वंचित हैं। इस कारण उनकी शिक्षा, छात्रवृत्ति और भविष्य पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। समाजजनों ने कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ को ज्ञापन सौंपकर इस समस्या का त्वरित समाधान करने की मांग की है।
*अस्थायी प्रमाण पत्र पर अटका भविष्य*
ग्राम बालपुर निवासी भरथरी नट ने बताया कि उनके पुत्र आशीष नट को 21 दिसंबर 2023 को तहसील सरसीवां से अस्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया था। लेकिन एक साल से ज्यादा बीत जाने के बावजूद आज तक स्थायी प्रमाण पत्र निर्गत नहीं हो पाया।
आशीष फिलहाल उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा है, लेकिन स्थायी जाति प्रमाण पत्र के अभाव में न तो उसे छात्रवृत्ति मिल पा रही है और न ही प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण का लाभ। यही स्थिति अन्य कई बच्चों की भी है।
*अधिकारियों से लगातार की गई शिकायतें बेअसर*
समाजजनों ने बताया कि इस मामले को लेकर 3 जनवरी 2025 को कलेक्टर कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। उसके बाद 10 जनवरी 2025 को सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग ने अनुविभागीय अधिकारी बिलाईगढ़ को पत्र भी लिखा था। इसके बावजूद आज तक स्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ।
परिजनों का कहना है कि जब भी बच्चे स्थायी प्रमाण पत्र बनवाने अनुविभागीय कार्यालय जाते हैं, तो वहां के बाबू कोई न कोई बहाना बनाकर लौटा देते हैं। इससे बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है और समाज में गहरी निराशा व्याप्त है।
*ग्रामसभा का प्रस्ताव भी किया गया नजरअंदाज*
गौरतलब है कि सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय रायपुर द्वारा वर्ष 2020 में जारी आदेश के तहत ग्रामसभा के प्रस्ताव पर जाति प्रमाण पत्र जारी करने का प्रावधान है। ग्राम पंचायत बालपुर ने 14 सितंबर 2023 को ग्रामसभा आयोजित कर नट जाति को प्रमाणित करते हुए प्रस्ताव पारित किया था।
इसके बाद भी प्रशासन ने स्थायी प्रमाण पत्र जारी नहीं किया। समाजजनों का कहना है कि यह आदेश और नियम केवल कागजों तक ही सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर अधिकारियों की उदासीनता के कारण बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है।
*दूसरे जिलों में मिला प्रमाण पत्र, बालपुर में अटका मामला*
नट समाज ने उदाहरण देते हुए बताया कि उनके ही समाज के युवराज नट (जिला जांजगीर-चांपा) और अरुणी नट (जिला बलौदाबाजार) को स्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है। वहीं बालपुर जैसे इलाकों में रहने वाले बच्चों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है।
इससे समाज के लोगों में भेदभाव का एहसास गहरा रहा है। उनका कहना है कि जब दूसरे जिलों में नट समाज के लोगों को यह अधिकार मिल सकता है तो बालपुर के बच्चों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
*ग्रामीणों का दर्द : “बच्चों का भविष्य अंधेरे में”*
ग्राम की महिला भूरी बाई नट ने आंखों में आंसू भरकर कहा –
“हमारे बच्चे पढ़ना चाहते हैं, बड़ा अधिकारी बनना चाहते हैं, लेकिन प्रमाण पत्र न मिलने से उनका सपना अधूरा रह जाता है। गरीब मां-बाप इतना खर्च नहीं उठा सकते। सरकार की योजनाएं भी हमें नहीं मिल पा रही हैं।”
वहीं युवा रामप्रसाद नट ने कहा –
“हम रोज रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब बच्चे पढ़ाई करके आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन प्रमाण पत्र की वजह से उन्हें बार-बार रोका जा रहा है। यह हमारे साथ नाइंसाफी है।”
*शिक्षा और रोजगार पर गहरा असर*
स्थायी जाति प्रमाण पत्र न मिलने के कारण नट समाज के बच्चों का भविष्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। शिक्षा में छात्रवृत्ति न मिलने से गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। वहीं उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में जाति प्रमाण पत्र जरूरी होता है, जिसके अभाव में बच्चे अवसरों से वंचित हो रहे हैं।
समाजजनों ने चिंता जताई कि यदि जल्द ही स्थायी प्रमाण पत्र नहीं मिला तो दर्जनों बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
*नट समाज की गुहार*
समाज के संभागीय अध्यक्ष मयाराम नट ने कहा कि बालपुर के नट समाज के लोग पीढ़ियों से इसी क्षेत्र में निवास कर रहे हैं और उनका पारंपरिक पेशा खेल-तमाशा रहा है। शासन के आदेशानुसार मिशल बदोबस्त न होने पर भी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए, लेकिन यहां के अधिकारियों की उदासीनता से समाजजनों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
*प्रशासन और शासन से मांग*
नट समाज ने जिला प्रशासन और राज्य शासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द बालपुर के नट समाज के बच्चों को स्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए, ताकि वे शिक्षा, छात्रवृत्ति और रोजगार का लाभ उठा सकें। समाज का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर त्वरित कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने पर विवश होंगे।




